कैसा है मेरा गाववाला और शहरवाला लोग कल अपुन ने मस्त पिक्चर देखा और गांव का दर्शन भी कर लिया | पिक्चर का हीरो अपना वेबसेरीज़ का बादशाह जो थोड़े दिनों में बॉलीवुड का बादशाह भी बन सकता है | अपना पंकज त्रिपाठी | स्टोरी ऐसा है ८० के टाइम का तब इतना कानून सख्त नहीं था कोई किसीका भी जमीन हड़प कर जाता था और पता भी नहीं लगता था | कभी आपको लगा की आप मर गए हो मगर फिर भी जिन्दा हो | सोच में पड़ गया ना बताता हु कैसे |
स्टोरी चालू होताय यू पी के आजमगढ़ गांव का उसमे पंकज त्रिपाठी एक बैंडवाला दिखालाय | जो शादी में बैंड बजाके अपना गुजारा करताय | तो वो अपनी बैंड बाजे की दूकान पे प्रैक्टिस कर रहा होता है | दूकान में उसको चूहा मिलता है और चूहे को नदी किनारे छोड़ देता है | इससे पता चलता है की वो कितना नरम दिल का आदमी है | अभी उसके दूकान पर एक पंडित बैठता है और उसको सलाह देताय के दूकान को बड़ा करनेका ताकि डबल कमाई हो | और उसकी बीवी भी बोलतिय लोन ले लो | तो पंकज त्रिपाठी लोन लेने के लिए सरकारी ऑफिस जाता है तो अफसर गारंटी पूछता है | तो पंकज त्रिपाठी बोलताय के उसकी पुश्तैनी जमीन है खलीलाबाद में चाची के साथ हिस्सेदारी में | अब वो निकल पड़ता है चाची के पास जमीन के बारे में बात करने के लिए | अब पिक्चर स्टार्ट होता है और गाना चलताय "बुलावे बुलावे बुलावे देसवा हमार" |
अब चाची से मिलनेके बाद जाता है सरकारी ऑफिस में और अफसर उसके स्कूल का दोस्त निकलताय | तो अफसर फाइल चेक करताय तो उसमे पंकज त्रिपाठी मरा हुआ घोषित किया है | तो ऑफिस में बहुत मचमच होता है | उसको पोलिसवाले मारके भगाते है | अब वो चाची के पास जाता है तो चाची कहती है सच कह रहा है वो | अब वो सारा मामला समझ जाता है ये सब अपनों का ही रचाया हुआ खेल है | अभी घर पर उसकी बीवी मोनाल गुज्जर करवा चौथ मनाते हुए और पंकज त्रिपाठी बोलताय की हम तो मर चुके है | दूसरे दिन सारा गांव उसके घर पे जमा होता है जैसे किसी की मय्यत पे जमा होते है वैसाहीच | और वो गुस्से में घर से निकल जाता है | जब वो चाय पिने बाहर जाता है तो लोग उससे दूर भागते है उसका दिमाग ख़राब होता है | उसी रात को बीवी भी बोलती है के भूत के साथ सो रही हूँ |
अभी सरपंचजीके पास जाता है मसला हल करनेको पर सरपंच नाचगाने में डूबा हुआ है | और पियेला होता है बोलता है मै लिखके देता हु के तुम ज़िंदा है | फिर सवेरे भूल जाता है | अब वो तहसीलदार को अर्जी भेजता है | फिर अर्जी पे अर्जी भेजता ही रहता है | एक दिन प्रधानमंत्री का जवाब आता है बीवी कंटाल जाती है ये सबसे | बीवी प्रेग्नेंट रहती है और लड़की होती है तो पंकज त्रिपाठी अपनी बच्ची को हाथ मै उठाके बोलताय उसको उसका मान सन्मान ज़रूर दिलवाएगा |
अभी एंट्री होती है सतीश कौशिक की वो वकील दिखायलाय इसमें | वो केस लेने से पहले दो लोगो से मिलवाता है जो कागज़ पे मरे हुए दिखाए है | वो गिवअप करनेको बोलताय और बहोत खर्चा होगा ऐसा समझाताय फिर भी पंकज त्रिपाठी राजी होताय | और थोड़ा पॉजिटिव होताय | अभी एंट्री होतीय मीता वशिष्ट की वो नेता दिखायलीय | उसकी रैली जा रही होती है तो रैली के आगे ही धरना देने बैठ जाता है तभी एंट्री होती है प्रेसवाली की | नेहा चौहान की और वो अखबार में छाप देती है और पंकज त्रिपाठी सेलिब्रिटी बन जाता है | खबर देखके मीता मैडम बोलतिय इन्क्वायरी करनेको तो नेहा चौहान उसके घर पे जाती है उसको इंटरव्यू लेने को पंकज त्रिपाठी सलून में दाढ़ी बना रहेला होताय उसको देखके भाग जाताय फिर वो बोलतिय की वो उसको मदद करना चाहती है |
अब पंकज त्रिपाठी नया प्लान बनाता है चाची के पोते को किडनैप करताय और फ़ोन करके बोलताय के मेरा हड़प कियेला जमीन मेरेको वापस करो | तभी उसका चचेरा भाई पुलिस में कंप्लेंट करने जाता है | तभी चाची के दिमाग की बत्ती जलती है | उसको रोकती है और उसकी चाल को समझ जाती है | अभी पंकज त्रिपाठी बोलताय बच्चे का मर्डर कर दिया ये भी झूठ निकलता है फिर खुद ही लाकर छोड़ देता है | फिर उसके चचेरे भाई पंकज त्रिपाठी को पीटते है और वो जाता है पुलिस स्टेशन में और पोलिसवाला पैसे लेता है फिर बोलता है अगले हफ्ते आने को | अभी मिटा वसिष्ट को मिलनेको जाता है वो बोलती है खुद को मरा हुआ बता फिर पंकज त्रिपाठी खुदका क्रियाकर्म करके जो लोग कागज़ के मरे हुए है उन सबको जमा करके अपनी एक पार्टी बनाता है |
अभी अपनी नेता मिटा वसिष्ट विधानसभा में ये मुद्दा उठाती है | इसमें मदद करती है रिपोर्टर नेहा चौहान | इधर सतीश कौशिक अपना नया ऑफिस खोलता है और एक आईडिया देता है | पंकज त्रिपाठी अपनी बीवी को लेकर सरकारी ऑफिस जाता है विधवाओं की पेंशन के लिए क्योंकि उसकी बीवी तो विधवा हो चुकी है कागज़ पर | इसमें सरकारी अफसर बेइज्जती करता है तो वो गुस्से में अपने माँ के पास जाती है | अभी सुबह कहानी में बड़ा ट्विस्ट दुनिया का मशहूर टाइम मैगज़ीन में पंकज त्रिपाठी का फोटो आताय अभी आगे क्या धमाल होता है उसके लिए आपको देखना पड़ेगा पिक्चर कागज़ | इस प्रॉपर्टी का मामला बहुत बकवास होता है कोई किसीका नहीं होता इसके लिए भी कोई कानून होना चाहिए | पिक्चर देखते वक़्त गांव के मिटटी की खुशबू ज़रूर आएगी | पंकज त्रिपाठी और सतीश कौशिक की धांसू एक्टिंग के लिए १० में से ९ खोका और आल दी बेस्ट ऐसाहीच बढ़िया पिक्चर बनाओ |